यूजीसी गाइड लाइन: सुप्रीम कोर्ट ने मोदी सरकार को \'जातीय हिंसा की लपट\' से बचा लिया!
31-01-2026 11:49:28 AM
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कैलाश सिंह-
राजनीतिक संपादक
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-वीपी सिंह के मंडल कमीशन सरीखे साबित होती मोदी सरकार के लिए यूजीसी गाइड लाइन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाकर देश में बढ़नी शुरू हुई 'जातीय हिंसा रूपी आग में पानी डालने का कार्य कियाl इसमें दिये गए नये नियमों से सामान्य वर्ग के पास दोषारोपण से बचाव का रास्ता ही नहीं थाl
-विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भेदभाव को बढ़ावा देने वाली यूजीसी की इस नई गाइडलाइन (कानून) को नए साल की 13 जनवरी को लागू किया गया थाl सुप्रीम कोर्ट ने इसपर 29 जनवरी को रोक लगाते हुए नये ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश दिया हैl अब अगली सुनवाई 19 मार्च को होगीl
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दिल्ली/लखनऊ, (तहलका न्यूज नेटवर्क)l युनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन 'यूजीसी' गाइड लाइन 13 जनवरी 2026 के लागू होते ही देशभर का सामान्य वर्ग (जनरल कैटेगरी) यानी सवर्ण समुदाय सड़कों पर आने लग गयाl दुनिया में भारत को तीसरी अर्थ व्यवस्था की तरफ़ ले जाने को अग्रसर मोदी सरकार यूजीसी की नई गाइड लाइन के लागू होते ही 'वीपी सिंह की सरकार के मण्डल कमीशन' वाले दलदल की तरफ़ बढ़ने लगी थीl यह तो समय रहते सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून पर रोक लगाने के साथ नए ड्राफ्ट तैयार करने का निर्देश दिया अन्यथा जातीय हिंसा की लपट जवालामुखी का रूप ले लेतीl इस मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को होनी हैl सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने यूजीसी के नए नियम के खिलाफ बढ़ते जातीय उन्माद पर इमरजेंसी ब्रेक ही नहीं लगाया, बल्कि भाजपा के 'राष्ट्रवाद और हिंदुत्व' वाले एजेंडे को भी खंडित होने से बचा लियाl
यूजीसी गाइड लाइन को लेकर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी भी सुप्रीम:उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी का निहितार्थ ये रहा कि 'हम जहां 21 वीं सदी में जातीयता से निकलकर अंतरजातीय विवाह की तरफ़ बढ़ रहे हैं, वहीं यूजीसी के नये नियम जातियों में भेदभाव का दायरा बढ़ाने वाले लग रहे हैंl यह बहुत गम्भीर मामला है जो समाज के लिए विभाजनकारी हो सकता हैl 75 वर्ष बाद भी क्या हम जातीय विहीन समाज की तरफ़ बढ़ने की बजाय पीछे जा रहे हैं? शिक्षण संस्थानों में अलग- अलग जातियों के छात्रों के लिए अलग हॉस्टल बनाने के गाइड लाइन में दिये गए सुझाव पर उन्होंने कहा कि भागवान के लिए ऐसा न करेंl हमारे देश में अंतरजातीय शादियाँ भी होती हैं और हम भी हॉस्टल में भी साथ- साथ रहते आये हैंl नए नियमों से सामान्य वर्ग के छात्रों में कुंठा बढ़ेगी और अन्य वर्गों में भेदभाव विकराल रूप ले सकता हैl
यूजीसी की नई गाइड लाइन का विरोध क्यों हुआ? नये नियमों में सामान्य वर्ग के छात्रों को पीड़ित नहीं माना गया थाl बल्कि उन्हें स्वाभाविक रूप से दोषी मान लिया गया थाl दिलचस्प ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने ही नये नियम बनाने को कहा थाl ऐसा क्यों कहा था अब इसे भी समझिये- वर्ष 2016 में हैदराबाद केंद्रीय विश्विद्यालय के एक छात्र रोहित वेमूला और उसके तीन साल बाद 2019 में महाराष्ट्र की एक दलित डॉक्टर पायल तडवी ने आत्महत्या कर ली थीl इन दोनों ने अपने खिलाफ जातीय उत्पीड़न का आरोप लगाया थाl इसके बाद उसी साल सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल की गईl फ़िर जनवरी 2025 में जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने यूजीसी को नये नियम बनाने के आदेश दिये थेl अब सुप्रीम कोर्ट ने ही इस नये नियमों में खामी देखकर रोक लगाते हुए फ़िर से नियम बनाने को केंद्र सरकार और यूजीसी को निर्देश दिये हैंl विदित हो कि वर्ष 2012 में बने यूजीसी के नियम को मानने की बाध्यता नहीं थी, लेकिन 13 जनवरी 2026 को लागू हुए कानून के मुताबिक नये नियम न मानने वाले संस्थानों के खिलाफ ग्रांट रोकने के साथ सख्त कार्रवाई का प्रावधान थाl वर्ष 2012 के यूजीसी नियम में जो प्रावधान थे उनमें एससी/एसटी छात्रों को ही पीड़ित के रूप में शामिल किया गया थाl जबकि 2026 में जो नियम बने उसमें एससी/एसटी के अलावा ओबीसी को भी शामिल कर लिया गयाl इसमें झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ किसी कार्रवाई का प्रावधान नहीं हैl जाहिर है सामान्य वर्ग स्वाभाविक रूप से दोषी मान लिया गयाl जबकि पुराने नियम में झूठी शिकायत मिलने पर आरोपी के खिलाफ दण्ड के प्रावधान थेl सामान्य वर्ग के छात्रों ने नये नियमों में तीन प्रमुख मुद्दों का विरोध कियाl इनमें पहला एससी/एसटी के साथ ओबीसी को पीड़ित श्रेणी में रखा गया जबकि सामान्य वर्ग को वंचित किया गयाl दूसरा- झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दण्ड का प्रावधान नहीं होना और तीसरा मुद्दा- शिकायत की सुनवाई करने वाली कमेटी में सामान्य वर्ग का कोई सदस्य क्यों नहीं रखा गया?
राजनीतिक विश्लेषक 'एस पांडेय' का मानना है कि भाजपा में भी 'सूडो सेकुलर' हैं जिन्हें हिंदुत्व की बढ़ती एकता नहीं पच रहीl भाजपा की केन्द्र सरकार को 'राष्ट्रवाद और हिंदुत्व' वाले एजेंडे से भटकाने और जातीय भेदभाव वाली खाई में ढकेलने के लिए पार्टी में अंदरखाने जरूर 'सूडो सेकुलर' हैंl पार्टी नेतृत्व को चाहिए कि ऐसे लोगों को चिन्हित करके बाहर का रास्ता दिखाएं, अन्यथा ये लोग भाजपा में रहकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी पार्टियों के एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम करते रहेंगेl यूजीसी की नई गाइड लाइन पर यदि सुप्रीम रोक नहीं लगती तो उग्र हो रहे सामान्य वर्ग के छात्रों के आक्रोश को ज्वालामुखी का लावा बनने में ज्यादा देर नहीं लगतीl क्योंकि भीड़ सड़कों पर उतरने लगी थीl यूजीसी में दिये गए प्रावधान बारूद की तरह काम करने लगे थेl क्रमशः
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